Showing posts with label poetry. Show all posts
Showing posts with label poetry. Show all posts

Wednesday, July 15, 2009

मेरी शर्म है मेरा ज़ेवर



हमने वीराने को गुलज़ार बना रखा है
क्या बुरा है जो हकीक़त को छुपा रखा है

दौरे हाज़िर में कोई आज ज़मीं से पूछे
आज इंसान कहाँ तूने छुपा रखा है ?

वो तो खुदगर्जी है ,लालच है, हवस है जिसका
नाम इस दौर के इन्सां ने वफ़ा रखा है

मैं तो मुश्ताक़ हूँ आंधी में भी उड़ने के लिए
मैंने ये शौक़ अजब दिल को लगा रखा है

मेरी बेटी तू सितारों सी ही रौशन होगी
ये मेरी माँ ने वसीयत में लिखा रखा है

अपने हाथों की लकीरों में हिना की सूरत
सिर्फ इक नाम तुम्हारा ही सजा रखा है

मैं के औरत हूँ मेरी शर्म है मेरा ज़ेवर
बस तख्खल्लुस इसी बाईस तो 'हया' रखा है !


दौरे हाज़िर=आज का ज़माना
मुश्ताक़ =उत्सुक
तखल्लुस =उपनाम
बाईस =कारण

हिंदी में अपने विचार दें

Type in Hindi (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi)