Monday, July 4, 2011

सॉरी मैडम , सॉरी मैडम


पहले तो मैं आप सब से सॉरी बोलती हूँ कि इतने दिनों बाद ब्लॉग पर सक्रिय हुई हूँ
मम्मी के जाने के बाद अभी तक उदासीनता की सरहद को लांघ नहीं पाई थी , जैसे diary खो जाने के बाद मैंने दूसरी किताब नहीं लिखी,वैसे ही माँ खोने के बाद तमाम गतिविधिओं से मन उचट सा गया था लेकिन एक ऐसी घटना हुई जिसने मुझे फिर से लिखने पर मजबूर किया
लीजिये,आप भी सुनिए;
" सॉरी मैडम, सॉरी मैडम "जब ऑटो वाले ने मुझसे ये कहा तो यकायक उसके लहजे पर मुझे हंसी आ गयी ,हालांकि वो आगे वाली गाड़ी को तक़रीबन ठोक चुका था लेकिन उससे माफ़ी मांगने के बजाए वो मुझसे मांगने लगा ,मैंने कुछ जवाब नहीं दिया ।
कुछ दिन पहले मै और मेरी एक सहेली किसी कार्यवश मालवानी गए थे । वहाँ से लौटते वक़्त हमने अँधेरी ओशिवरा के लिए एक ऑटो पकड़ा ,मेरी सहेली अपने पिताजी की तबियत को लेके कुछ परेशान थी इसलिए मुसलसल फ़ोन पर व्यस्त थी और मैं हमेशा की तरह कुछ खोजते हुए , सोचते हुए लोगों को observe करने के मूड में थी । बस उसी दौरान एक बार नहीं,दो बार नहीं जब तीसरी बार रिक्शा चालक किसीको ठोकते- ठोकते बचा तो मैंने उसे टोका और फिर जो गुफ़्तगू उसके और मेरे दरमियान हुई ,वो कुछ यूं थी ;

मै :- क्यों भाई,मरने का इरादा है क्या?
ऑटोवाला:- नहीं,सॉरी मैडम,सॉरी मैडम

मैं :- तो फिर ऐसे क्यूँ चला रहे हो,हमें मारना है?
: (हसंकर) नहीं नहीं,सॉरी मैडम सॉरी मैडम

मैं :- अकेले हो क्या,घर वाले नहीं हैं?
:- नहीं मैडम,सब हैं,पांच लोग हैं

मैं :- तो उनके लिए नहीं जीना चाहते?लगता है अकेले कमाने वाले हो इसलिए परेशान हो
:- नहीं मैडम,सब कमाते है

मैं:- ओह,तो फिर ये सोच रहे हो कि सब तो कमाते हैं,मै मर भी गया तो क्या
:- नहीं नहीं मैडम,ऐसा नहीं है

मैं:- तो फिर क्यों ऐसे गाड़ी चला रहे हो?
:- अरे मैडम आप नहीं जानतीं, बहुत टेंशन है

मैं:- अरे , भरा पूरा परिवार है,सब कमाते हैं ,फिर क्या टेंशन?
:- अरे मैडम,मेरी - बीवियां है

मैं:- क्या,- बीवियां? ओह ,तो ये है टेंशन(मैंने हँसते हुए आगे पूछा)क्या नाम है तुम्हारा?
:- सलीम

मैं:- बीवियों का नाम?
:- बड़ी का जास्मीन,छोटी का फ़हमीदा

मैं:- और बच्चे?
:- (शरमाते हुए) बच्चे हैं

मैं:- अरे ,बड़े खुशनसीब हो भाई,तुम तो खुद भी भरे- पूरे हो
:- अरे नहीं मैडम,आप नहीं जानतीं ,परेशान हो गया हूँ दोनों की मच- मच से ,दोनों को रोज़ के २००-२०० रूपये देता हूँ इस महंगाई के दौर में ,फिर भी.....

मैं:- तो भाई क्यों की दूसरी शादी ?
:- मैंने नहीं,घर वालों ने ज़बरदस्ती करवादी

मैं:- ऐसे कैसे करवादी,कोई जवान लड़के के साथ कैसे ज़बरदस्ती कर सकता है ?
:- अरे मैडम,दूसरी बीवी ,पहली बीवी की बेहेन इच है .

मैं:-(अब मैं फिर चौंकी)अरे बड़ी की सगी बहिन से दूसरी शादी? ये तो बिलकुल ग़लत है
:- हालात ही ऐसे हो गए थे मैडम, वो छोटी है ना किसी अब्बास नामके लड़के के साथ भाग गयी थी !
उसको पकड़ के ,ख़ूब मारे,बहुत बदनामी होगई ,कोई उससे निकाह करने को राज़ी इच नहीं ,अब्बास लफड़ा किया ,मै फंसा और फिर सबने छोटी का निकाह मेरे से करवा दिया।

मैं:- बड़ी शादी के लिए राज़ी होगई थी?
:- ख़ूब झगड़ी,अभी भी नाराज़ है

मैं:- तो सही है ना,छोटी की ग़लती की सजा बड़ी को क्यूँ?छोटी को थोडा टाइम देना चाहिए था संभलने का ,शर्मिंदा होने का,और कुछ वक़्त गुज़र जाने के बाद अच्छा लड़का देख कर उसकी शादी करवा देते,क्यों सुन्दर नहीं है क्या छोटी?
:- अरे क्या बताऊँ मैडम,बहुत खूबसूरत है ,कटरीना जैसी (इतराते हुए),आप उसको भीड़ में भी खड़ा कर देंगी ना तो अलग से दिखेंगी

मैं:- ओह,तब ही तुम तैयार होगये, शायद बड़ी ज़्यादा...
:- (जल्दी से) नहीं नहीं मैडम,बड़ी भी कुछ कम नहीं है माशा अल्लाह

मैं:- तो फिर काहेका टेंशन ? - खूबसूरत बीविओं के शौहर हो भैया, नसीब वाले हो
:- अरे मैडम,२००-२०० इनको दो,१०० रूपये मेरा ख़र्चा दिन का, २००-३०० पेट्रोल के, २००-३०० फलाना- फलाना ख़र्चा...मतलब रोज़ का १००० रूपये मांगता ना

मैं:- ऑटो किसका है?
:- मेरा ख़ुद का

मैं:- जब किराए का नहीं है तो क्या टेंशन?ऑटो तुम्हारा ख़ुद का ,बीवियां तुम्हारी ख़ुद की,बच्चे तुम्हारे ख़ुद के ,और क्या चाहिए ? ख़र्चा तो निकाल ही लेते हो
:- हाँ,वोह तो है पर बचत कहाँ..-- घर चलाना आसान है?

मैं:- तो बीवियों को बोलो , घर बैठे कुछ काम करलें जैसे पापड़ बनाना,सिलाई करना....
:-(तैश में आके ) अरे मैडम,दोनों ख़ूब पढ़ी लिखी है,चाहें तो बाहर अच्छी नौकरी करलें

मैं:- हाँ तो करवादो?
:- (और भी तैश में) नहीं नहीं,औरत से काम नहीं करवाने का,उनकी कमाई नहीं खाने का

मैं:- (अब मेरी बारी थी चौंकने की) भई वाह,बात तो तुमने मर्दों वाली की है,ये हुई ना कोई बात,अरे तुम तो बुत ख़ुद्दार हो भई वरना आज के ज़माने में तो अच्छे पढ़े लिखे, पैसे वाले लोग भी कमाऊ औरत चाहते हैं ,कुछ तो सिर्फ़ औरतों की कमाई पर ऐश करते हैं ,तुम तो बिलकुल ऐसे नहीं हो भई
:- (ख़ुशी से चहकते हुए) हाँ मैडम,thank u ,thank u


मैं:- तो बताओ,तुम उन पढ़े लिखे,अमीरज़ादों ,आराम तलब मर्दों से ज़्यादा "खुशकिस्मत ,अमीर ,ख़ुद्दार हो के नहीं" ?
:- हाँ मैडम

मैं:- तो फिर बताओ,क्यूँ टेंशन? achaaaaa.... समझ गयी,ऑटो चलाते- चलाते पक गए हो? taxi कार चलाना है?
:- अरे मैडम taxi waxi नहीं मांगता,अपन ऑटो में ही ख़ुश हैं


मैं:-अच्छा तो एक और ऑटो मांगता है?
:- (हँसते हुए) हाँ हाँ चलेंगा ..

मैं:- तो बस,मेहनत शुरू करदो ,इंशा अल्लाह अगले साल तक ऑटो भी हो jayenge
:- (ख़ुश होके) हाँ मैडम

मैं:- तो बस,- बीवियां , -- बच्चे , -- ऑटो ,हिसाब बराबर ..एक की कमाई एक बीवी को,दूसरे की दूसरी को ,और तुम तो मर्द हो ही ,अल्लाह और देगा
:- (बहुत ख़ुश होकर)हाँ हाँ मैडम,शुक्रिया शुक्रिया


मैं:- तो सलीम,अब तो गाड़ी ढंग से चलाओगे ना?कोई टेंशन तो नहीं पालोगे ,किसी को ठोकोगे तो नहीं?
:- सॉरी मैडम ,सॉरी मैडम


हमारा घर आ चुका था ,मैंने उसे पेमेंट किया और कहा ,"इंशा अल्लाह फिर कभी मुलाक़ात होगी",उसके जाते ही मेरी सहेली बोली :- " लता,तू कितनी अच्छी counselling करती है, मै इतनी परेशान थी लेकिन तू जिस तरह उसको समझा कर यहाँ तक लायी , और वोह ख़ुश ख़ुश गया ,मै सोचने लगी की counselling भी एक आर्ट है "
लेकिन मै अपनी सहेली के compliment पे ख़ुश होने के बजाए सोचने लगी कि मै सब को समझाती हूँ ,रस्ते में,घर में,शूटिंग में,महफ़िल में, गार्डेन में,लेकिन खुद की counselling नहीं कर पायी तो क्या किया? ये तो वही बात हुई " खुद गुरु जी बैंगन खाएं, दूसरों को उपदेश सुनाएं "

उस रात मैंने खुद कि counselling की, ख़ुद से गुफ़्तगू की ,सवाल जवाब किये,ख़ुद को समझाया ,ये ज़िन्दगी का दस्तूर है,जीवन की आवाजाही है..किसी के जाने से ऐसे रुका तो नहीं जाता? और बस ख़ुद से ही ये कहते हुए उठ खड़ी हुई - सॉरी मैडम,सॉरी मैडम ,और ये पोस्ट लिख डाली



कई मरहलों से गुज़रना है मुझको,
अभी तो बहुत दूर चलना है मुझको,




शुक्रिया

33 comments:

  1. तुम्हारी ये अलग किस्म की पोस्ट बहुत मजेदार लगी. छोटी सी घटना को जिस अंदाज़ से यहाँ पेश किया गया है वो कमाल है. शायरी यूँ भी की जाती है. वाह...किसी के दुःख दर्द बाँटना बहुत नेक काम है. किसी नाउम्मीद की झोली में उम्मीद के गुहर डाल देना बहुत सबाब का काम है...इस पोस्ट के लिए तुम्हारी जितनी तारीफ़ की जाय कम है. लिखती रहो क्यूँ की अच्छी बातें ज्यादा से ज्यादा बाहर आणि चाहियें.

    नीरज

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  2. जी हाँ, अभी तो बहुत दूर चलना है आपको…

    लता जी, आपकी पोस्ट के लिए आँखें तरस गई थीं, मेल करके कारण भी पूछा था कि क्या हो गया… चलिए, आप अपनी उदासनीता से बाहर आई, और ऐसी खूबसूरत पोस्ट देकर हम सभी को हंसाया-गुदगुदाया भी…

    बस, इसी तरह चाहे दो चार शेर ही सही, छोटी-मोटी कोई बात ही सही, ब्लॉग के माध्यम से शेयर कर लिया कीजिए… यह उपस्थिति बनी रहनी चाहिए… जिन्दगी की तमाम दु:ख-तकलीफ़ों के बावजूद, तमाम व्यस्तताओं के बावजूद…

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  3. http://charchamanch.blogspot.com/

    आज आप चर्चा मंच पर हैं ||

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  4. आपकी रचना समालोचना के लिए रखी गई है |
    http://charchamanch.blogspot.com/

    आज आप चर्चा मंच पर हैं ||

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  5. बहुत खूब लता जी !
    पहली बार आपको पढ़ने का मौका मिला...
    बहुत अच्छा लगा...
    मेरे ब्लॉग पे आपका स्वागत है -

    mymaahi.blogspot.com
    meri-mahfil.blogspot.com

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  6. आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/


    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

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  7. पहली बार पढ रहा हूँ आपको...अच्छा लगा...पहली बार पढ रहा हूँ आपको...अच्छा लगा...

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  8. लता जी आपने बहुत ही अच्छा लिखा है

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  9. aap fir aayeen vo bhi itni prernaspad baaton ke saath.....bahut achcha laga,ab aate rahiyega.....

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  10. aap fir aayeen vo bhi itni prernaspad baaton ke saath.....bahut achcha laga,ab aate rahiyega.....

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  11. ek arse baad aana huaa......aam aadmee , jingee se jude samvad choo gaye....
    dairee milee ya nahee...?

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  12. Dear Lata,
    I was introduced to your shayari only a few days ago by my friends in Lucknow. I liked it generally.
    But I was shocked by two of your poems in which you praised Osama Bin Laden for taking on America and in other you criticised Hindus for worshiping so many gods and praised Islam for avoiding But-puja.
    I think you should remember that Osama's Al Qaeda was fighting with India in Kashmir. Would you still praise Osama? Also remember noone crticised Saddam for invading liberal Kuwait.

    Also when Pakistan attacks India , people suddenly turn pious and talk of being one blood, brotherhood, aman , peace etc. Still no praise for any body taking on Pakistan. Just ponder over it.
    As regards your criticism of multi Godism in Hinduism, I think you must delve deep into Hindu philosphy. A Hindu may worship any thing, a stone,tree, photo even nothing, as per his choice so long as his bhakti is true. Meera's bhakti is spiritual. That's what Hinduism about. Hinduism is a way of life. It is not a sect whose membership depends upon following certain rituals. If you don't follow those rituals , woe betide you. Read Geeta deeply, you'll learn what vedanta is.
    You may follow whatever faith, including Islam , but don't be against Hinduism or India.
    God has showered you a rare gift of being an actress and poetess, don't use only to gain some publicity and invites to mushairas in India and Abroad.
    You write well. Write for your soul only. you'll feel truly happy.
    God bless you

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  13. hello brother ,
    saw ur comment just now .your anger is jusr coz u misunderstood me, mere bhai m not denouncing any religion . i love peace ,humanity and unity. i believe in 'insaniyat mazhab '.no mazhab is bad only d followers make it bad. i just want 2 say dat we ignore insaan but praise blood, statue.kursi,money etc..in our country farmers doing suicide due 2 debt, poor becoming criminals due to hunger .curruption is everywhere but we r spending money 4 superstitions and over d nonliving things which we could have used 2 save so many helpless people.
    yes no doubt that i love urdu and very much impressed by islam...coz its a very good.and universal religion but it doesn't mean dat m insulting hindus. how could I ? if i love urdu does it mean I hate hindi or any other language ? if i feel dis is d most beautiful language ,m i denoncing English ? no brother i dont need only wah wah .or publicity or masala or sympathy.i m on stage since so many years,I never used any bad words,foul comments or latka-jhatka. i just need ur love and blessings . and one more thing jo allah kahelwata hai wo main kahti hoon.i dont write.. 2 writing poetery is a god giftlike thing so m nothing.without his blessings and words. kahin bhi kutch bhi bura hota hai to mera dil bhi rota hai .qatl.nafrat. firqaparasti.sazish kaun pasand karega. I request u 2 hear that nazm once again.;in 2.3 bands im appealing 4 peace, insaniyat ,good deed and good path.. it may take time 2 make u understand

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    1. अदा जी ...वास्तव में आपने मुस्लिम धर्म के बारे में तो पढ़ लिया है ..जो कि सिर्फ धार्मिक कायदे-कानूनों की एक ही किताब है .... हिन्दू धर्म जिसे दर्शन ही कहाजाना चाहिए गहराई से न पढ़ा ही है न् समझा है आपके शब्द, कथ्य-भाव आदि व विचार स्पष्ट ज्ञान से प्रकाशित नहीं हैं--- जोश-खरोश की, दैनिक बातों-तथ्यों की शायरी लिखना, सीरियल लिखना एक अलग सामान्य बात है ... परन्तु जहां वास्तविक साहित्य एवं सामाजिकता, संस्कृति की बात हो वहाँ समुचित ज्ञान की आवश्यकता होती है......यदि आप वास्तव में ज्ञान चक्षु खोलना चाहती हैं तो शिशिर जी ने जैसा कहा हिन्दू धर्म का, दर्शन का गहन अध्ययन करिये ...

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  14. Dear Lata,
    I'm not angry, but a little sad.
    I don't doubt that you are humane and peace loving .

    My point was that when you are on public platform for poetry recital, you need to be some extra careful as you are widely heard (yes, I'm told Lata Haya is heard !) so as to avoid any misinterpretation.

    Look, you probably were anti-war when you criticized Bush for capturing Saddam and in that vein praised Laden.But, this was a political war. Saddam had earlier attacked Kuwait and Laden never preached peace.

    So obviously your words of criticism of Bush and praise of Laden can be attributed to purpose other than your opposition to war and violence.

    Similarly, when you criticised Multi Godism of Hindus vis-a-vis Islamic concept of one universal god,you might have done because of your personal belief of one god (as Adwaitvad professes). But when you do it on public platform, it appears that you are pandering to certain section of your audience , sacrificing the purity of poetry.

    'Malik' is never selective. If you hear 'malik' with true faith in Him, it'll give you the strength and courage of conviction to be universal. We become selective only when we try to associate ourselves with some man-made thoughts , groups or things.

    One more thing before I end. Write what you are able to 'respect' and not just 'like'. You , then, will never write substandard stuff.

    May your poetry give you all the happiness in the world.
    God bless you.

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    1. ---बहुत सुन्दर , साफ़ एवं सटीक लिखा है शिशिर जी....बहु - देवत्व अत्यधिक गहराई वाला तत्व है .....अत्यधिक उन्नत -ज्ञान, विवेक व स्वयं की सोच-समझ वाला तत्व न कि किसी एक तत्व या देव के पीछे चलते रहना ...
      --- और यह तथ्य द्वैत या अद्वैत नहीं है ...क्योंकि दोनों ही तत्व-ज्ञान हिन्दू दर्शन में हैं....

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  15. Lata wakai bahut khoob ho . likhne ko to Lata jee bhi likh sakta hun par Lata agar likhoonga to apne aur kareeb paaoonga kyonki jaisa ki profile me aapne likha hai aapka taaaalluk jaipur se bhi kuchh na kuchh raha hai Isliye ek pariwar ki member ki tarah treat karna munasib hogaa. khair bahut achhaa, aalaa, shaandaar or bada hi laajawab pahla blog aapka jiski padh kar lagaa ki likhne walaa bhi koi hai kuchh kuchh............lots of respect and love....................hakam

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  16. "उस रात मैंने खुद कि counselling की, ख़ुद से गुफ़्तगू की ,सवाल जवाब किये,ख़ुद को समझाया ,ये ज़िन्दगी का दस्तूर है,जीवन की आवाजाही है..किसी के जाने से ऐसे रुका तो नहीं जाता? और बस ख़ुद से ही ये कहते हुए उठ खड़ी हुई - सॉरी मैडम,सॉरी मैडम"
    बहुत उम्दा प्रस्तुति....

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  17. Very nice post, padhkar bahut achcha laga.

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  18. लता जी
    यूं ही घूमते फिरते आपके ब्लॉग पर आना हुआ
    और by chance ही ये लेख पढ़ा
    आपके इस लेख को पढ़ कर ऐसा लगा जैसे मुझे मेरे ही सवालों के जवाब मिल गए
    शुक्रिया

    कभी मौका मिले तो मेरे ब्लॉग पर जरुर आइयेगा
    स्वागत है :)

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  19. आपकी हर पोस्ट किसी पत्थर-दिल को भी सोचने पर मजबूर कर देती है | इस बार भी आपने इसी सीढी पर अपना एक और कदम रखा अपनी लाजवाब भाषा-शैली के साथ | एक और विचारात्मक पोस्ट के लिए आपको हार्दिक बधाई !! :)समय मिले तो मेरे ब्लॉग पर भी आये व् ज्वाइन कर के सहभागी बने
    http://jeetrohann1.blogspot.com

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  20. लताजी एक कम कीजये आप १ महिना बिना किसी से बात किये बगैर चुप चाप गहर पे बैठये और कोई किताब लिखने की कोशिश कीजये या कुछ दिल की बात कलम से निक्लाये बहुत उम्दा निकल के आयेगा.लेकिन आप क पोस्ट शायरी आग देखि मुझे लगता है आपके दिले में कोई चीज़ है जो आपको परेशां कर रही है.और बहुत वक़्त से उसका जवाब ढूंढ रही हैं नहीं मिला है इस्ल्ये आप इन मेह्फिलूँ में कुछ कहके आपने अंदर के उस कसक को बयां अकरने की कोशिश कर रही हैं. अछी बात है ये कसक आपको जिंदा रखेगी लेकिन आपका अकेलापण आपका दुश्मन है. ,लेकिन काम अगर वक़्त लेके कीजये तो और बढ़िया कलम निकलेगा. अल्लाह आपको सुकून दे.,

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  21. लता जी दो दिन पूर्व मै मैने आपकी नज्म सुनी और हैराण हुवा फिर नेट पर तलाश करने के बाद ब्लोग मिला शुरू मै तो आप को मुसलमा समज बैठ था जैसे और लोग समजते होंगे लेकीन जब पता चला आप जन्म से नही कर्म से मुसलमान से कम नही तो फक्र हुवा अच्चा लगा आप तो अच्ची श्यारा है लेकीन नेक दिल इन्सान है आप कि श्यारी ने मुजे दिवाना बना दिया है .....संदीप deore धुले महाराष्ट्र.

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  22. LataJi, It has become famous for people to degrade Hindus and Hinduism in the conventions and at the same time praise islam as peaceful.Followers of Islam do everything bad, but you still say religion is peaceful, Followers of Hinduism does all things peaceful, but you still say the religion is bad. Where in Vedas did it mention about islam, I never understood, unless you are reading the Allahupanishad written by poor scared brahmins under the threat of sword by barbaric muslim invaders who feared for their lives. I don't have a problem in you praising islam, just denounce the followers for all the evil they created, and in the same sentence don't denigrate hindus. If you want to talk against hinduism, you can express your views, but not to please a certain section of people. Thanks for listening.

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  23. थेंक्यू मेडम... थेंक्यू मेडम .. अच्छा लिखा

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  24. बहुत उम्दा पोस्ट सारी मैडम का जबाब नहीं |

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  25. बहुत ही सुन्दरता से आपने अपने विचारों को व्यक्त कर डाला | आपकी इस पोस्ट को पढ़कर मेरी भी कोउन्सल्लिंग हो गई | मैं भी कुछ ऐसी ही परेशानी से गुज़र रहा हूँ किसी के चले जाने से पर आपने सच कहा के किसी के चले जाने से ज़िन्दगी रुका नहीं करती | आपका बहुत बहुत शुक्रिया | ऐसे ही लिखती रहिये | आभार |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  26. सच मे बहुत खूब लिखा है। आजकल मैं भी बहुत चिंतित हूँ । समझ नहीं आता क्या करू। ये वाली पोस्ट पढ़के अच्छा लगा।

    और हाँ आपकी एक कविता "मैं हिन्दी की बेटी हूँ ।" से प्रभावित होके एक कविता मैं भी हिन्दी भाषा के लिए लिख रहा हूँ ।

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  27. kisi ke chale jane se duniya nahi rukti ,ap to vaise bhi rukne ke liye nahi ange badne ke liye he ,apke sabdo me ek alag sandesh hota he ,jo jeene ke sahi mayne batata he .apko har jaga h search karte hue ,yaha bhi pahuch gai,didi kya karu apse apki rachnao se mohabbat ho gai he,

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  28. kisi ke chale jane se duniya nahi rukti ,ap to vaise bhi rukne ke liye nahi ange badne ke liye he ,apke sabdo me ek alag sandesh hota he ,jo jeene ke sahi mayne batata he .apko har jaga h search karte hue ,yaha bhi pahuch gai,didi kya karu apse apki rachnao se mohabbat ho gai he,

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  30. लता जी आपने बहुत ही सुन्दर तरीके से एक दुखी मन को सुखी मन में बदल दिया और उसको जीने के लिए प्रोत्साहित किया जो की बहुत ही तारीफ़ योग्य है आप अपनी ऐसी ही रचनाओं को शब्दनगरी पर भी लिख सकती हैं .........

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